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दीपा मैडम

"बाथरूम की ओर जाते समय पीछे से उसके भारी और गोल मटोल नितंबों की थिरकन देख कर तो मेरे दिल पर छुर्रियां ही चलने लगीं. मैं जानता था मेट्रो शहरों की लड़कियां केवल बातचीत में ही नहीं व्यवहार में भी बड़ी बोल्ड होती हैं.

मधु की प्रेग्नेंसी की वजह से मेरी इच्छा पूरी नहीं हो पा रही थी. पर इतनी खूबसूरत सांचे में ढली मांसल देह तो मैंने आज तक नहीं देखी थी. काश यह राज़ी हो जाए तो कसम से मैं तो इसकी जिंदगी भर के लिए गुलामी ही कर लूं.

हालांकि हमारी शादी को साल भर ही हुए थे और हम लगभग रोज़ ही मधुर मिलन का आनंद लिया करते थे. मैंने मधु को लगभग हर तरह से घर के हर कोने में जी भर कर प्यार किया था. पता नहीं हम दोनों ने इस तरह कितने ही नए अध्याय लिखे होंगे. कई बार तो रात को मेरी बाहों में आते ही मधु बहुत चुलबुली हो जाया करती थी.

हमारा वैवाहिक जीवन वैसे तो बहुत अच्छा चल रहा था पर मधु व्रत-त्योहारों के चक्कर में बहुत रहती. आये दिन कोई न कोई व्रत, और अब यह प्रेग्नेंसी.

दीपा को महल्ले में आए अभी 4 महीने ही हुए थे. वह एक प्राइवेट स्कूल में टीचर है, जहां मधु भी पढ़ाती थी. वह तलाकशुदा है. फिर तो महल्ले के लड़कों के साथ-साथ उसको निहारने में मैं भी पीछे नहीं रहा. कई बार मधु के ही काम से मैं उसके घर जा चुका था.

बरसात के दिन थे, जब एक रात मधु के ही काम से मैं उसके घर रजिस्टर लौटाने गया. उसने नीली जींस और गुलाबी झीना टॉप पहना हुआ था. इस ड्रेस में वह बहुत मस्त लग रही थी. उसने कॉफी का ऑफर दिया तो मैं खुद को रोक न सका.

कुछ देर बाद मैं चलने को हुआ कि लाइट चली गई. मुझे न हिलने का कहकर वो मोमबत्ती लाने किचन की ओर भागी और किसी चीज से टकरा कर कारपेट पर गिर गई. मैं उसे संभालने को हुआ तो उसके पैर से टकराकर उसी के ऊपर जा गिरा. हम कुछ देर यूं ही पड़े रहे. एक दूसरे की गरम सांसें हमें छेंड़ने लगीं. मुझे लगा समय यहीं थम जाए और मैं उसे बांहों में भींच लूं.

पर शायद आग उधर भी लगी थी. उसने मेरे होंठों पर अपने नर्म होंठ जमा दिए. मैं भी खुद को रोक न सका और उसे मसलने लगा. एकदूजे पर हम ऐसे टूट पड़े जैसे जन्मों के प्यासे हों.

जब लाइट आई तब ही हम अलग हुए. उसने खुद को समेटा और अधनंगी हालत में कमरे की ओर भागी. मेरी प्यास अभी तक बुझी न थी. मैं भी पीछे -पीछे कमरे में घुस गया. उसकी खुली जुल्फें मेरे चेहरे पर किसी काली घटा की तरह बिखर गईं और फिर मैं ने उसे बांहों में जोर से भींच लिया कि उसकी चित्कार ही निकल गई. बस उसके बाद...

इस तरह हमारा रोमांस हमारे घर पर नन्हीं परी के आने तक चलता रहा. दीपा की तरफ से इंकार तो आया ही, मैं भी मेरी प्यारी बेटी परी से दूर नहीं जाना चाहता था.

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